राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला—विदेश नीति पर उठाए सवाल
नई दिल्ली: विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर मोदी सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के भारत दौरे के दौरान विपक्षी नेताओं से मुलाकात की अनुमति न देने पर राहुल ने इसे “सरकार की असुरक्षा” करार दिया है। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
राहुल गांधी का आरोप – 'सरकार विपक्ष से विदेश नेताओं को मिलने नहीं देती'
राहुल गांधी ने कहा कि—
> “जब भी कोई विदेशी नेता भारत आता है या मैं विदेश जाता हूँ, मोदी सरकार उन्हें कह देती है कि विपक्ष से न मिलें। यह लोकतांत्रिक परंपरा के खिलाफ है।”
उन्होंने दावा किया कि अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के समय में ऐसी रोक-टोक नहीं होती थी और विपक्ष तथा वैश्विक नेताओं के बीच संवाद को हमेशा प्रोत्साहित किया जाता था।
🔵 पुतिन से मुलाकात पर रोक—विवाद की शुरुआत
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा को लेकर विवाद तब बढ़ा जब राहुल गांधी ने कहा कि वह उनसे मिलना चाहते थे, लेकिन केंद्र सरकार ने ऐसा होने नहीं दिया।
राहुल के मुताबिक:
उन्हें मीटिंग की अनुमति नहीं दी गई
यह नियमों या प्रोटोकॉल का मसला नहीं, बल्कि सरकार की “असुरक्षा” है
भारत की विदेश नीति अब “केवल सरकार की छवि” पर केंद्रित हो गई है
विदेश नीति पर राहुल के सवाल
राहुल गांधी ने कई गंभीर मुद्दे उठाए:
1. लोकतांत्रिक परंपराओं में गिरावट
वह कहते हैं कि दुनिया की बड़ी लोकतांत्रिक देशों में विपक्ष से मुलाकात ‘सामान्य प्रक्रिया’ है।
2. विदेश नीति का केंद्रीकरण
उनका कहना है कि विदेश नीति अब कुछ लोगों तक सीमित हो गई है जबकि पहले यह संस्थागत और पारदर्शी हुआ करती थी।
3. वैश्विक छवि पर असर
राहुल का आरोप है कि विपक्ष को दरकिनार करके सरकार भारत की लोकतांत्रिक छवि कमजोर कर रही है।
सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया?
अब तक सरकार ने इस आरोप पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया है।
बीजेपी नेताओं का सामान्य रुख यह रहा है कि राहुल गांधी “निराधार आरोप लगाकर विदेशी मामलों को राजनीतिक रंग देते हैं।”
हालांकि, इस विशेष मामले पर केंद्र की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
📰 राजनीतिक हलकों में चर्चा क्यों बढ़ी?
इस बयान ने इसलिए सुर्खियाँ पकड़ ली हैं क्योंकि:
पुतिन की यात्रा पहले से ही रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है
रूस-भारत संबंध वैश्विक तनावों के बीच नई दिशा ले रहे हैं
विपक्ष ने पहली बार इस तरह से "विदेश नीति में हस्तक्षेप" का सीधा आरोप लगाया है
निष्कर्ष — चुनावी साल में विदेश नीति भी गर्म मुद्दा
राहुल गांधी के आरोपों ने मोदी सरकार की विदेश नीति को एक नई बहस के केंद्र में ला दिया है।
आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और पुतिन यात्रा के बाद की परिस्थितियाँ तय करेंगी कि यह विवाद कितना आगे बढ़ता है।
ध्यान देने वाली बातें
सरकार की तरफ़ से अभी तक किसी आधिकारिक बयान में ऐसा कुछ नहीं आया कि “हमने बैठक नहीं दी क्योंकि …” — मतलब, ये दावा अभी से पूरी तरह साबित नहीं हुआ है।
राजनीतिक तौर पर, इस तरह की बातों को “दावा – आरोप” माना जाता है — मीडिया व राजनीतिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग व्याख्या हो सकती है।
