बिहार के समस्तीपुर जिले के रोसड़ा (वारिसनगर विधानसभा क्षेत्र) से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां करीब 8 करोड़ 65 लाख रुपये की लागत से बना पुल पिछले 13 वर्षों से अधूरा पड़ा है। हालत यह है कि आज यह पुल लोगों के काम आने के बजाय गेहूं और फसल सुखाने के लिए इस्तेमाल हो रहा है।
2013 में शुरू हुआ था निर्माण
इस पुल का निर्माण कार्य साल 2013 में शुरू हुआ था। लेकिन जमीन विवाद और प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह प्रोजेक्ट अधूरा ही रह गया। आज तक पुल का काम पूरा नहीं हो सका।
चढ़ने के लिए भी नहीं है रास्ता
सबसे हैरानी की बात यह है कि इस पुल पर चढ़ने के लिए कोई पक्का रास्ता (एप्रोच रोड) नहीं बनाया गया। ग्रामीणों ने खुद चंदा इकट्ठा करके सीढ़ी (स्टेयर) बना दी, जिससे लोग पैदल किसी तरह ऊपर-नीचे आ-जा सकें।
JCB मशीन भी बनी “गिरवी”
गांव वालों का आरोप है कि ठेकेदार ने काम अधूरा छोड़ दिया और मजदूरों का पैसा नहीं दिया। इसके चलते ग्रामीणों ने ठेकेदार की JCB मशीन को गिरवी रख लिया, ताकि उनका पैसा वापस मिल सके।
जमीन विवाद बना सबसे बड़ा कारण
ग्रामीणों के अनुसार, पुल निर्माण के दौरान पूरी जमीन का अधिग्रहण नहीं किया गया। कुछ लोगों ने अपनी जमीन देने से मना कर दिया, जिससे पुल का डिजाइन और पिलर गलत तरीके से बना दिया गया।
13 साल से रुका काम, जनता परेशान
पुल अधूरा होने के कारण लोगों को सिर्फ 100 मीटर की दूरी तय करने के लिए 3 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है।
मरीजों को अस्पताल ले जाना मुश्किल
शादी-ब्याह में भारी परेशानी
रोजाना हजारों लोग प्रभावित
करोड़ों खर्च, फिर भी बेकार
आज यह पुल पूरी तरह जर्जर हो चुका है। कई जगह से टूट भी रहा है। इतना बड़ा बजट खर्च होने के बावजूद यह पुल जनता के किसी काम का नहीं रहा।
